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पैसे की वसूली के लिए legal notice: कब भेजें और उसमें क्या लिखें

अगर किसी पर आपका पैसा बकाया है, तो कानून भले न माँगे, पहला कदम आम तौर पर legal notice ही होता है। लिखित माँग से ब्याज की गिनती शुरू हो सकती है, और सामने वाले का हस्ताक्षर किया जवाब समय-सीमा को नए सिरे से शुरू करा सकता है। पर नोटिस समय-सीमा को रोकता नहीं, इसलिए तीन साल पूरे होने से काफी पहले भेजें।

आख़िरी बदलाव

क्या पहले नोटिस भेजना ज़रूरी है?

किसी व्यक्ति या कंपनी के खिलाफ पैसे के मुकदमे से पहले कानून नोटिस को अनिवार्य नहीं बनाता।

सरकार के खिलाफ, या किसी सरकारी अधिकारी के खिलाफ उसके सरकारी काम के दौरान किए गए कार्य के लिए, यह अनिवार्य है। सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 (Code of Civil Procedure) की धारा 80 कहती है कि कोई मुकदमा "until the expiration of two months next after notice in writing has been" दिए जाने तक दायर नहीं होगा।

कारोबारी विवादों का पहला कदम अलग है। अगर दावा "ordinary transactions of merchants, bankers, financiers and traders" जैसे लेन-देन से जुड़ा "commercial dispute" है, तो वाणिज्यिक न्यायालय अधिनियम, 2015 (Commercial Courts Act) की धारा 12A कहती है कि मुकदमा "shall not be instituted unless the plaintiff exhausts the remedy of preinstitution mediation"। जिस मुकदमे में तुरंत अंतरिम राहत माँगी गई हो, उस पर यह लागू नहीं होता। यह तब लागू होता है जब दावा धारा 2(1)(i) की "Specified Value" का हो, जो "shall not be less than three lakh rupees"। यह सीमा पहले एक करोड़ रुपये थी। 2018 के अधिनियम संख्या 28 (Act 28 of 2018) ने इसे 3 मई 2018 से घटाकर तीन लाख कर दिया।

फिर भी नोटिस क्यों भेजें

मुकदमे के मुकाबले नोटिस का खर्च बहुत कम है, और लिखित माँग देखकर कई लोग पैसा लौटा देते हैं। कानूनी तौर पर भी नोटिस दो काम करता है।

ब्याज शुरू हो सकता है। जहाँ ब्याज पर कोई समझौता नहीं था, वहाँ ब्याज अधिनियम, 1978 (Interest Act) की धारा 3 अदालत को "from the date mentioned in this regard in a written notice given by the person entitled or the person making the claim to the person liable that interest will be claimed" ब्याज दिलाने की छूट देती है। अगर कर्ज़ promissory note जैसे किसी लिखित दस्तावेज़ के तहत तय तारीख पर चुकाना था, तो ब्याज उसी तारीख से गिना जा सकता है। इसलिए नोटिस में साफ़ लिखें कि आप ब्याज माँगेंगे, और किस तारीख से। दर अदालत तय करेगी, "at a rate not exceeding the current rate of interest"। अगर ब्याज पर समझौता हुआ था, तो वही समझौता लागू होगा।

जवाब से समय-सीमा फिर से शुरू हो सकती है। अगर सामने वाला जवाब में कर्ज़ मान लेता है, तो वह चिट्ठी नई समय-सीमा शुरू कर सकती है। इस पर नीचे विस्तार से बात है।

समय-सीमा, और नोटिस उसे क्यों नहीं रोकता

पैसे के ज़्यादातर दावे तीन साल के भीतर अदालत में दायर करने होते हैं। ये अवधियाँ परिसीमा अधिनियम, 1963 (Limitation Act) की अनुसूची में हैं। इनमें से मुख्य अवधियाँ सुप्रीम कोर्ट ने Syndicate Bank v. Channaveerappa Beleri (10 अप्रैल 2006) में उद्धृत कीं।

दावा समय-सीमा कब से गिनें
"For money payable for money lent" (Article 19) तीन साल "When the loan is made"
"For money lent under an agreement that it shall be payable on demand" (Article 21) तीन साल "When the loan is made"
"Any suit for which no period of limitation is provided elsewhere in this Schedule" (Article 113) तीन साल "When the right to sue accrues"

बकाया बिल, promissory note और तय तारीख पर लौटाए जाने वाले कर्ज़ के लिए दूसरे articles हैं, और उनकी शुरुआती तारीख अलग होती है। आपके दावे पर कौन-सा article लागू होगा, यह किसी वकील से पूछें।

देर से दायर मुकदमा खारिज होगा, भले सामने वाला यह मुद्दा उठाए ही नहीं। धारा 3 कहती है कि वह "shall be dismissed, although limitation has not been set up as a defence"।

आपका अपना नोटिस इस अवधि को नहीं बढ़ाता। सामने वाले की लिखी सिर्फ़ दो चीज़ें इसे बढ़ाती हैं।

क्या होता है असर कानून
वह अपने हस्ताक्षर वाली चिट्ठी, email या मैसेज में कर्ज़ मान लेता है "a fresh period of limitation shall be computed from the time when the acknowledgment was so signed" धारा 18
वह कर्ज़ का कुछ हिस्सा चुकाता है, और उस भुगतान को लिखकर मानता है "a fresh period of limitation shall be computed from the time when the payment was made" धारा 19

दोनों तीन साल पूरे होने से पहले होने चाहिए। धारा 18 के लिए ऐसा लिखित दस्तावेज़ चाहिए जो "signed by the party against whom such property or right is claimed" हो। जवाब "is accompanied by a refusal to pay" हो, तब भी वह स्वीकृति मानी जा सकती है। आंशिक भुगतान के लिए धारा 19 कहती है कि स्वीकृति "appears in the handwriting of, or in a writing signed by, the person making the payment" होनी चाहिए।

इसलिए हर जवाब और हर भुगतान का रिकॉर्ड संभालकर रखें।

नोटिस में क्या लिखें

  1. पक्षकार. आपका पूरा नाम और पता, और सामने वाले का सही नाम और पता।
  2. रकम. बकाया की सही रकम, और किस्तों में दी गई हो तो उसका छोटा ब्योरा।
  3. कर्ज़ कैसे बना. कर्ज़ देने की तारीख और मकसद, या invoice, या किया गया काम।
  4. सबूत. बैंक ट्रांसफर, रसीद, promissory note, chat या email। इनकी सूची दें। असली कागज़ साथ न लगाएँ।
  5. ब्याज. कि आप ब्याज माँगेंगे, और किस तारीख से।
  6. समय-सीमा. भुगतान की साफ़ आखिरी तारीख, जैसे नोटिस मिलने के 15 दिन के भीतर।
  7. अगला कदम. कि पैसा न मिलने पर आप अदालत जाएँगे।

सिर्फ़ तथ्य लिखें। धमकियाँ और ऐसे दावे जिन्हें आप साबित नहीं कर सकते, सामने वाले के ही काम आते हैं। जो कागज़ आप साथ लगा रहे हैं उस पर Aadhaar या PAN नंबर हो, तो पहले उसे छिपा दें।

नोटिस कैसे भेजें

सामने वाले के आखिरी ज्ञात पते पर, पावती (acknowledgement due) के साथ रजिस्टर्ड डाक या स्पीड पोस्ट से भेजें। रसीद और tracking का प्रिंटआउट संभालकर रखें, नोटिस पहुँचने की तारीख का सबूत यही हैं। साथ में email या WhatsApp पर भी एक कॉपी भेजें।

अगर आप नोटिस हमसे तैयार करवाना चाहते हैं, तो हमारी legal notice सेवा देखें।

जब कोई दूसरा नियम लागू हो

अगर पैसा लौटाने के लिए दिया गया चेक बाउंस हुआ है, तो उसके लिए अलग आपराधिक उपाय है, और उसके नोटिस की समय-सीमा सिर्फ़ 30 दिन है। वह समय-सीमा बहुत छोटी है, इसलिए पहले चेक बाउंस नोटिस गाइड पढ़ें।

अगर पैसा किसी सरकारी विभाग पर बकाया है, तो मुकदमे से पहले धारा 80 के तहत दो महीने का नोटिस भेजना होगा, जब तक अदालत किसी तुरंत ज़रूरी मुकदमे को बिना नोटिस दायर करने की अनुमति न दे।

उसके बाद क्या होता है

सामने वाला पैसा चुका दे, तो मामला खत्म। न चुकाए, तो आप सिविल अदालत में वसूली का मुकदमा कर सकते हैं। अगर दावा तीन लाख रुपये या उससे ज़्यादा का वाणिज्यिक विवाद है, तो पहले मुकदमे से पहले की मध्यस्थता में जाना होगा। वाणिज्यिक विवादों में धारा 12A कहती है कि मध्यस्थता में लगा समय "shall not be computed for the purpose of limitation"।

अदालत की फ़ीस हर राज्य में अलग होती है, इसलिए अपने राज्य की दर जाँच लें। तीन साल पूरे होने से पहले, सही अदालत और सही article के बारे में किसी वकील से बात करें।

लोग क्या पूछते हैं

वसूली का मुकदमा करने से पहले legal notice भेजना ज़रूरी है?
किसी व्यक्ति या कंपनी के खिलाफ ज़रूरी नहीं। सरकार के खिलाफ, या किसी सरकारी अधिकारी के खिलाफ उसके सरकारी काम के दौरान किए गए कार्य के लिए, सिविल प्रक्रिया संहिता की धारा 80 के तहत लिखित नोटिस और दो महीने का इंतज़ार ज़रूरी है। तीन लाख रुपये या उससे ज़्यादा के वाणिज्यिक विवाद में, जब तक मुकदमे में तुरंत अंतरिम राहत न माँगी गई हो, पहले मुकदमे से पहले की मध्यस्थता (pre-institution mediation) करनी होती है।
नोटिस भेजने से समय-सीमा बढ़ जाती है?
नहीं। आपका अपना नोटिस समय-सीमा को नए सिरे से शुरू नहीं करता। कर्ज़दार की हस्ताक्षर की हुई लिखित स्वीकृति, या आंशिक भुगतान जिसे उसने लिखकर माना हो, ऐसा करता है।
क्या नोटिस सिर्फ़ WhatsApp पर भेज सकते हैं?
रजिस्टर्ड डाक या स्पीड पोस्ट ज़्यादा सुरक्षित है, क्योंकि डाक का रिकॉर्ड नोटिस पहुँचने की तारीख साबित करता है। WhatsApp या email पर भी एक कॉपी भेजें, पर डाक की जगह नहीं।
ब्याज पर कभी कोई समझौता नहीं हुआ था। क्या ब्याज माँग सकते हैं?
माँग सकते हैं। ब्याज अधिनियम, 1978 की धारा 3 के तहत अदालत आपके लिखित नोटिस में दी गई तारीख से, अपनी तय की हुई दर पर, ब्याज दिला सकती है। अदालत ऐसा करने के लिए बाध्य नहीं है।
सामने वाले ने जवाब में लिखा कि बाद में दे देंगे। क्या इससे मदद मिलेगी?
हाँ, वह जवाब संभालकर रखें। कर्ज़ मानने वाला हस्ताक्षर किया लिखित जवाब परिसीमा अधिनियम की धारा 18 के तहत नई समय-सीमा शुरू कर सकता है। उस पर भरोसा करने से पहले किसी वकील को दिखा लें।

यह सामान्य जानकारी है, क़ानूनी सलाह नहीं। अपने मामले के लिए किसी वकील से बात करें।